सिगरेट पीने की लत से ऐसे पा सकते हैं छुटकारा
सरकार का कहना है कि भारत में हर साल 10 लाख लोग
लोग सिगरेट पीने से मरते हैं. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (2016-17) के
मुताबिक़ भारत में सिगरेट पीने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज़्यादा है.
इन
आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने एक सितंबर से सिगरेट के
पैकेट पर एक हेल्पलाइन नंबर लिखने का फ़ैसला किया है. ये नंबर है: भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक अगले महीने से सिगरेट के पैकेट पर लिखा होगा - आज ही छोड़ें, कॉल करें 1800-11-2356.
नए पैकेट में चित्र और चेतावनी दोनों ही बदली होगी. हेल्पलाइन नम्बर के साथ पैकेट पर 'तंबाकू से कैंसर होता है' या फिर 'तंबाकू से दर्दनाक मौत होती है' लिखा होना भी जरूरी होगा.
वैसे तो ये सेवा केन्द्र 2016 से दिल्ली में चल रहा है. हेल्पलाइन पर फोन करते ही सबसे पहले रिकॉर्डेड आवाज़ आती है - हम आपके तंबाकू छोड़ने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. हमारे काउंसलर जल्द ही आपसे बात करेंगे.
कई बार काउंसलर व्यस्त होने की वजह से बात नहीं करते और फोन कट जाता है.
इस हेल्पलाइन पर तीन बार फोन करने के असफल प्रयास के बाद काउंसलर के पास हमारा नम्बर भी लगा. फ़ोन पर एक महिला की आवाज़ सुन कर वो थोड़ा हैरान थी.
काउंसलर से जब उनकी हैरानी का सबब पूछा तो उन्होंने खुद बताया कि देश में केवल तीन फ़ीसदी महिलाएं ही तंबाकू का सेवन करती हैं.
सिगरेट छोड़ने के हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन करने वाले ज़्यादातर पुरूष होते हैं. महिलाएं फ़ोन करती भी हैं तो अपने पति-भाई या दूसरे सगे संबंधियों के लिए करती हैं.
फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला.
काउंसलर पहले आपसे आपके सिगरेट पीने का इतिहास पूछतीं हैं - मसलन कब से सीगरेट पी रहे है? आपको लत कब से लगी है? एक दिन में कितनी पीते हैं? वगैरह वगैरह..
उनके मुताबिक ये जानना इसलिए ज़रूरी है ताकि ये पता लगा सकें कि उस शख़्स के लिए सिगरेट की लत छोड़ना कितना आसान या मुश्किल है.
इतना जान लेने के बाद, काउंसलर सिगरेट पीने वाले से ही पूछते हैं - सिगरेट छोड़ने की डेडलाइन क्या है?
इसका मक़सद ये है कि पता लगाया जा सके - लत छोड़ने के लिए आप कितने तत्पर हैं और संजिदा भी. हली सलाह - सुबह उठते ही 2 ग्लास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर लें. पानी में शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.
दूसरी सलाह - सिगरेट पीने का जब भी मन करें, "खुद को समझाएं कि मुझे सिगरेट पीना छोड़ना है." सिगरेट छोड़ने के लिए इच्छाशक्ति सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.
तीसरी सलाह - इच्छाशक्ति के साथ, जब आप सिगरेट छोड़ने की डेडलाइन तय कर लें और उसके बाद आपको सिगरेट पीने की तलब लगे, तो आप आराम से बैठें, लंबी सांस भरे और पानी पी लें. ऐसा करने से आपका ध्यान भटकेगा.
चौथी सलाह - अदरक और आंवला को कद्दू-कस कर उसे सूखा लें और नींबू और नमक डाल कर डिब्बे में भर कर हमेशा अपने साथ रखें. जब भी सिगरेट पीने की तलब लगे, आप थोड़ी थोड़ी देर पर इस पेस्ट का सेवन कर सकते हैं. इसके आलावा मौसम्मी, संतरा और अंगूर जैसे फल और उनका रस पीना भी सिगरेट की तलब मिटाने में मददगार होता है.
हेल्पलाइन नंबर पर ये सलाह देने के बाद काउंसलर आपके साथ हफ्ते भर के अंदर फॉलो-अप कॉल भी करती हैं.
फ़िलहाल एक दिन में इस हेल्पलाइन नंबर पर 40-45 कॉल आते हैं. काउंसलर के मुताबिक जिस दिन अख़बारों में विज्ञापन छप जाता है उस दिन कॉल की संख्या ज़्यादा हो जाती है.
ये हेल्पलाइन सेंटर सुबह आठ बजे से शाम के आठ बजे तक काम करता है. यहां फ़िलहाल 14 काउंसलर काम करते हैं.
हेल्पलाइन नंबर पर मिलने वाले मदद के मुताबिक सिगरेट या तंबाकू छोड़ने के कोशिश के शुरूआती दिनों में स्वाभाव में चिड़चिड़ापन, घबराहट, छटपटाहट होती है. ये लक्षण इस बात पर निर्भर करता है कि किसको, कितनी सिगरेट पीने की आदत है और कितने दिन से आदत है. क्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर के चेयरमैन डॉ. हरित चतुर्वेदी के मुताबिक नए तरीके के चित्र-चेतावनी से दो तरीके के फ़ायदे होंगे.
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैंने आज तक कोई ऐसा इंसान नहीं देखा तो तंबाकू की लत छोड़ना नहीं चाहता. इस तरीके से हेल्पलाइन नंबर सिगरेट पर लिखे होने से उनको पता चलेगा कि आख़िर सिगरेट छोड़ने के लिए जाना कहां है, किनसे बात करनी है. इसके आलावा जो लोग सिगरेट पीना शुरू कर रहें हैं वो पहले से ही सावधान हो जाएंगे."
डॉ. हरित चतुर्वेदी के मुताबिक भारत में पिछले दिनों तंबाकू के पैकेट पर छपे चेतावनी की वजह से साल दर साल ऐसे लोगों की संख्या लगातार घट रही है.
आस्ट्रेलिया में सरकार ने 2006 में सिगरेट के पैकेट पर इसी तरह से हेल्पलाइन नंबर लिखना शुरू किया था. ये तरीका वहां कितना कारगर रहा, इस पर 2009 में एक रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट के मुताबिक पैकेट पर हेल्पलाइन नंबर छपने के बाद हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने वालों की संख्या बढ़ी, जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि छोड़ने वालों को असली तरीका पहले पता नहीं था.
दुनिया के 46 देशों में तंबाकू के उत्पाद पर पैकेजिंग के समय ऐसे नंबर लिखे होते हैं.
वॉलंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सीईओ भावना मुखोपाध्याय के मुताबिक, "ग्लोबल अडल्ट टोबैको सर्वे (2016-17) में ये बात सामने आई है कि 62 फ़ीसदी सिगरेट पीने वाले, 54 फ़ीसदी बीड़ी पीने वालों ने चित्र चेतावनी देख कर तंबाकू छोड़ने का निश्चय किया. ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है."
डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक, " एक महीने तक कोई सिगरेट नहीं छूता तो ये वापस सिगरेट पर लौटने की संभावना कम हो जाती है. लेकिन छह महीने तक अगर कोई न पीए, तो दोबारा सिगरेट पीना शुरू करने की संभवना खत्म हो जाती है."
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